यदुवंश का वर्णन
(2)
वर्णयामि महापुण्यं सर्वपापहरं नृणां ।
यदोर्वन्शं नरः श्रुत्त्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।
यत्र-अवतीर्णो भग्वान् परमात्मा नराकृतिः।
यदोसह्त्रोजित्क्रोष्टा नलो रिपुरिति श्रुताः।।
(श्रीमदभग्वत् -महापुराण)
(1)
यदोवनशं नरः श्रुत्त्वा सर्वपापैः परमुच्यते।
यत्राव्तीर्णं कृष्णाख्यं परंब्रह्म निराकृति ।।
(श्री विष्णु पुराण)
अर्थ:
(यदु वंश परम पवित्र वंश है. यह मनुष्य के समस्त पापों को नष्ट करने वाला है. इस वंश में स्वयम भगवान परब्रह्म ने मनुष्य के रूप में अवतार लिया था जिन्हें श्रीकृष्ण कहते है. जो मनुष्य यदुवंश का श्रवण करेगा वह समस्त पापों से मुक्त हो जाएगा.यादव भारत एवं नेपाल में निवास करने वाला एक प्रमुख जाति है, जो चंद्रवंशी राजा यदु के वंशज हैं | इस वंश में अनेक शूरवीर एवं चक्रवर्ती राजाओं ने जन्म लिया है, जिन्होंने अपने बुद्धि, बल और कौशल से कालजयी साम्राज्य की स्थापना किये | भाफ्वान श्री कृष्ण इनके पूर्वज माने जाते हैं |
प्रबुद्ध समाजशास्त्री एम्. एस ए राव के अनुसार यादव एक हिन्दू जाति वर्ण, आदिम जनजाति या नस्ल है, जो भारत एवं नेपाल में निवास करने वाले परम्परागत चरवाहों एवं गड़ेरिया समुदाय अथवा कुल का एक समूह है और अपने को पौराणिक राजा यदु के वंशज मानते हैं | इनका मुख्य व्यवसाय पशुपालन और कृषि था |
यादव जाति की जनसंख्या भारत की कुल जनसंख्या के लगभग 16% है | अलग-अलग राज्यों में यादवों की आबादी का अनुपात अलग-अलग है| 1931 ई० की जनगणना के अनुसार बिहार में यादवों की आबादी लगभग 11% एवं उत्तर प्रदेश में 8.7% थी | यादव भारत की सर्वाधिक आबादी वाली जाति है, जो कमोबेश भारत के सभी प्रान्तों में निवास करती है | नेपाल में भी यादवों के आबादी लगभग 20% के आसपास है| नेपाल के तराई क्षेत्र में यादव जाति की बहुलता अधिक है, जहाँ इनकी आबादी 25 से 30% है|
वर्त्तमान एवं आधुनिक भारत में यादव समुदाय को भारत की वर्त्तमान सामाजिक एवं जातिगत संरचना के आधार पर मुख्य रूप से तीन जाति वर्ग में विभक्त किया जा सकता है
अतीत की घटनाओं का वर्णन इतिहास कहलाता है इतिहास शब्द (इति +ह +आस ) अस धातु लिट् लकार अन्य पुरुष तथा एक वचन से बना है यह तात्पर्य है "यह निश्चित था " ग्रीस के लोग इतिहास के लिए हिस्ट्री शब्द का प्रयोग करते है हिस्ट्री का शाब्दिक अर्थ है बुनना,अनुमान, होता है की ज्ञात घटनावो को व्यवस्तित ढंग से बुनकर ऐसा चित्र उपस्थित करना जो सार्थक और सुसबन्द हो।
इतिहास का अध्यन न सिर्फ वर्तमान को टिक करने में वार्ना अतीत में हुई गलतियों को सुधारने में किया जाता है (अनुर आन्नद मिस्र) इतिहास सिखाता है की हम अपने गौरव शाली पूर्वजो द्वारा किये गए महान कार्य से कुछ सीखे और उनकी भूलो से बचे इतिहास का अध्यन वर्तमान से अच्छे जीवन को प्रेता स्रोत एव पथ प्रदर्शक होता है महापुर्षो के जीवन से देश के होनहार नवयुवको को नव उत्साह एव स्फूर्ति होती है अपने महापुर्षो के जीवन का अनुशीलन किसी भी जाति को अपने आदर्श स्थापित करने के लिए अवश्य है|
महाभारत में वर्णन है की पुरे यत्न से इतिहास की रक्छा करनी चाहिए, इतिहास और प्राचीन गौरव नष्ट कर देने से विनास निश्चित है|
यदुवंश का इतिहास जानने के लिए सृष्टि रचना मनुष्य उन्नति सामाजिक सरचना राजवंशो का उद्रव आदि से अवगत होना आवश्यक है सृष्टि उत्पत्ति के बारे में मूलता दो मान्यताये है पहला धार्मिक और दूसरा बैज्ञानिक यह धार्मिक मान्यतावो के आधार पर सरल एव संछिप्त संकलन का प्रयास किया गया है
पुराण आदि धार्मिक ग्रंथो से विषयात मत्सय महापुराण के अध्यन से पता चलता है की सॄष्टि रचना से पूर्व सम्पूर्ण जगत गहन अंधकार से ढका हुआ था पृथ्वी, आकश, सूर्य, चन्द्रमा, जीव, जंतु पेड़, पौधे, पहाड़,नदिया, आदि कुछ भी नहीं था उस समय पूर्ण ब्रह्म परमेस्वर जिनको स्वयंभू नारायण या भगवान नारायण कहा जाता है का प्रादुर्भाव हुआ
भगवान नारायण ने सुर्ष्टि उपत्ति की इच्छा से सबसे पहले जल उत्पन्न किया जल में से अपनी शक्ति (वीर्य )का आधान किया जल में पड़कर वीर्य शाहस्तो सूर्य के सामान देदीप्यमान एक विशाल सुरणमय अंडे के रूप में प्रकट हुआ वह दीघ्काल तक जल में स्थित था उसी अंडे से ब्रम्हा जी उत्पन्न हुए कुछेक ग्रंथो में ब्रम्हा जी की उत्पत्ति भगवान श्री विष्णु की नाभि कमल से बताया गया है सृष्टि वर्दी के उदेश से महातेजस्वी ब्रम्हा ने सात मानस पुत्र उत्पन्न किये जिसके नाम मरीचि, अत्री, पुलस्त्य, पुलह, क्रतु, वरिष्ठ,और कौशिक थे ब्रह्मा जी की आँख से अत्री अवतरित हुए महर्षि अत्री की पत्नी का नाम अनुसुइया था ब्रह्मा के अंश स्वरूप अत्री दम्पति के चन्द्रमा नामक एक अमृतं पुत्र उत्पन्न हुआ यहाँ से चन्द्रमा वंश प्रांरभ हुआ चन्द्रमा के वंसज चंदवंशी छत्रिय कहलाये चन्द्रमा से बुध नामक एक सुन्दर एव बुद्धिशाली बालक उत्पन्न हुआ उसकी माता का नाम तारा था बुध और उसकी पत्नी ईला से पुरवा नामक पुत्र उत्पन्न हुआ पुरवा और उनकी पत्नी उर्वशी से आयु पैदा हुआ आयु और उनकी पत्नी प्रभा से नहुस पैदा हुए नहुस और उनकी पत्नी विरजा से ययाति उत्पन्न हुए यातति और उनकी पत्नी देवयानी से यदु पैदा हुए यदु से यादव वंश चला यादव वंश में यदु की कई पीढ़िया के बाद वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से सोलह कला संपन्न पूर्ण ब्रह्म यदु कुल शिरोमणि भगवान श्री कृष्ण मानव रूप में अवतरित हुए
श्रीकृष्ण स्वयं भगवन है श्रीमद भागवत महापुराण के प्रथम स्कंध के तृतीय अध्याय के श्लोक संख्या २७ और २८ का वर्णन में आता है
ऋषि मनु देवता प्रजापति मनु पुत्र मीन कर्म आदि सब भगवान के अंश है कोई कलाकार है कोई अंशावतार है परन्तु श्री कृष्ण स्वयं भगवान है सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के रचिता और कण में विद्यमान रहने वाले भगवान श्री कृष्ण चराचर सम्पूर्ण जगत के स्वामी रच्छक और पालन हार है वे सर्वातीत स्वः स्वरुप शक्तिमान स्वः व्यापी अनंत अशीम और अनादि है जाति धर्म देश काल कुल आदि सभी सीमावो से परे है किन्तु दुश्री तरफ यह भी सत्य है की उन्होनें यदुकुल में अवतार लिया और यादवो के पूर्वज कहलाये इससे यदुवंशी का गर्वित होना स्वाभाविक है भगवान श्री हरी के यदुकुल में अवतार लेने से यह वंश परम पवित्र हो गया |
"यदु वंश परम पवित्र वंश है यह मानव से समस्त पापो को नष्ट काने वाला है इस वंश में स्वयं भगवान् पर ब्रह्म ने मनुष्य के रूप में अवतार लिया था जिन्हे श्री कृष्ण कहते है जो मनुष्य यदुवंश का श्रवण करेगा वह समस्त पापो से मुक्त हो जायेगा"
यादव उपनाम सायद पहला उपनाम है जो पौराणिक है उसके वंशज आज भाई गर्व से अपने नाम के साथ जोड़ते है यादवो ने सनातन धर्म (हिन्दू धर्म ) का कई धरोवर व अमूल्य विराशत प्रदान की है संगीत के क्षेत्र में अहीर भैरवी राग जग प्रसिद्ध है हिन्दू धर्म के तीन पवित्रम पहचान गीता गाय व गंगा है जिसमे से दो गीता वा गाय हम यादवो से सम्बंधित है जो हमारे लिए गर्व की बात है ऐसे अनेक उदाहरण है जो हमारी श्रेष्ठा व उत्तमता का घोतक है अतःउठो जागो और अपने गौरवकोइतिहास परम्परा व विराशत को पहचान कर महभारत कालीन यदुवंश के चरमोत्कर्ष को प्राप्त करे|
जय यादव ………जय माधव...... जय श्री कृष्णा........ (श्री राकेशकुमार आर. यादव)……
“यादव समाज सेवा विकास ट्रस्ट की योजनाए”
१. सामूहिक विवाह (गरीब परिवार की बेटिवो का समूह में विवाह आयोजित करना और फालतू के खर्च से बचाना)
२. समाज में दहेज़ प्रथा नाबूद करने का प्रयास करना
३. महिलावो के लिए शिलाई बुनाई कढ़ाई जैसी योजनाये
४. बेटी बचावो बेटी पढावो कन्या भूण हत्या के प्रति समाज के लोगो को जागृत करना
५ .व्यसन मुक्ति जागर्ता
६. युवा अकस्मिक मृत्यु योजना
७. निशुल्कः क़ानूनी सलाह
८. बच्चो को वार्षिक पारितोषिक प्रोत्साहन (इनाम वितरण )
९. गरीब परिवार के लोगो को सरकारी योजनावो का लाभ दिलाना
१० बुजुर्गो की सेवा (वृद्धाश्रम स्थापित करके बुजुर्गो को सेवा करना)
११. समाज के कल्याण और उत्थान के लिए कार्य करना
१२.किसान क्लब
Creative team
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetuer adipiscing elit. Aenean commodo ligula eget dolor. Aenean massa cum sociis.

Shree Manoj Kumar R. Ahir
Organization PresidentLorem ipsum dolor sit amet, consectetuer adipiscing elit. Aenean commodo ligula eget dolor.

Shree Rakesh R. Yadav
Organization V. PresidentLorem ipsum dolor sit amet, consectetuer adipiscing elit. Aenean commodo ligula eget dolor.

Shree Ravishankar R. Yadav
Organization SecretaryLorem ipsum dolor sit amet, consectetuer adipiscing elit. Aenean commodo ligula eget dolor.

Shree Jayesh Kumar B. Yadav
TreasurerLorem ipsum dolor sit amet, consectetuer adipiscing elit. Aenean commodo ligula eget dolor.

Shree Mahesh Kumar Yadav
FounderLorem ipsum dolor sit amet, consectetuer adipiscing elit. Aenean commodo ligula eget dolor.